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Reliance Jio उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी मार्च के बाद भी पार्टी

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रिलायंस जियो 31 मार्च के बाद नया टैरिफ प्लान लांच करने जा रही है, जो कि 30 जून तक वैध रहेगा। इस प्लान के मुताबिक, कॉलिंग के लिए किसी प्रकार का कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। जियो उपभोक्ताओं को केवल नेट का प्रयोग करने के लिए 100 रुपये का शुल्क देना होगा, जो 3 महीने के लिए वैध होगा।

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भोपाल सेंट्रल जेल में गार्ड की हत्या कर फरार हुए सिमी के आठों सदस्य एनकाउंटर में मारे गए

भोपाल:  भोपाल की जेल से रविवार रात गार्ड की हत्या कर फरार हुए सभी कैदियों को पुलिस ने शहर के बाहरी इलाके में एक एनकाउंटर में मार गिराया है. राज्य के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ईंटखेड़ा गांव में पुलिस ने सभी को घेर लिया जिसके बाद हुए एनकाउंटर में सभी मारे गए. ये सभी आतंकी सिमी से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं.

अखिलेश यादव के समर्थक समाजवादी पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे

लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के चाणक्य माने जाने वाले पार्टी महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने पूरी योजना बना ली है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी योजना बनी है कि कभी पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पार्टी समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) में सपा का अखिलेश गुट मिल जाएगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ऐसी योजना बनी है कि रामगोपाल यादव जल्द ही साइकिल चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने के लिए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने वाले हैं। ऐसा करते ही सिंबल को लेकर विवाद की स्थिति बन जाएगी और फिर गेंद चुनाव आयोग के पाले में होगी। उधर प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने एक जनवरी को डॉ राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में सुबह 11बजे पार्टी का आपातकालीन प्रतिनिधि सम्मेलन बुला लिया है। रामगोपाल यादव के नाम से जारी इस विज्ञप्ति में पार्टी के प्रतिनिधियों से आह्वान किया गया है कि वे इस कार्यक्रम में जरूर भाग लें। 

मुस्लिम स्कूल का हिंदू नाम रखने की माँग

हिंदुस्तान टाइम्स   ने लिखा है कि त्रिपुरा के उनाकोटी ज़िले में एक गांव है जुबराजनगर जो पूरी तरह मुस्लिम बहुल है लेकिन यहां मुस्लिम लड़कियों के एक स्कूल का नाम एक हिंदू महिला के नाम पर रखने की मांग उठ रही है. जुबराजनगर में अकेली हिंदू महिला सुमति सूत्रधार ने 1999 में अपने पति की मौत के बाद अपनी ज़मीन शिक्षा विभाग को देने का फ़ैसला किया था. पिछले साल 29 दिसंबर को उनका निधन हो गया था. शुरुआत में कुछ मुसलमानों ने उनकी ज़मीन पर बनने वाले स्कूल का विरोध किया था लेकिन पिछले 17 सालों में यहां से 550 से ज़्यादा छात्राएं पढ़ चुकी हैं. सुमति सूत्रधार इसी स्कूल में एक छोटे से कमरे में रहती थीं. अब गांववाले चाहते हैं कि उन्होंने अपनी ज़मीन दान देकर गांव की बच्चियों का भविष्य रोशन किया इसलिए इस स्कूल का नाम सुमति सूत्रधार के नाम पर रख दिया जाए.